16 जून से स्कूल खुलेंगे, पर बच्चों के हाथ में किताबें नहीं! छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम की लापरवाही ने बढ़ाई मुश्किलें”
छत्तीसगढ़ में 16 जून से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने वाला है, लेकिन सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 50 लाख से अधिक बच्चों को मिलने वाली निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें अभी तक छपी ही नहीं हैं! यह देरी छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम की लापरवाही के कारण हुई है, जिसने भ्रष्टाचार रोकने के लिए क्यूआर कोड वाली किताबें समय पर तैयार नहीं कीं।
क्या हुआ गड़बड़?
– सरकार ने पुस्तकों में क्यूआर कोड लगाने का आदेश दिया था, ताकि घोटालों पर रोक लग सके।
– लेकिन निगम ने इस आदेश को अनदेखा कर दिया, जिससे छपाई में देरी हो गई।
– अब तक केवल हाई स्कूल की किताबें ही छप पाई हैं, जबकि पहली से आठवीं तक की किताबें अभी भी प्रकाशन में हैं।

बच्चों की पढ़ाई पर संकट
– 10 जून तक किताबें स्कूलों तक पहुंचनी थीं, लेकिन अब जुलाई तक का इंतजार करना पड़ सकता है।
– पहले घोटाले (पिछले साल किताबों की कालाबाजारी) के बाद इस बार सीधे स्कूलों में वितरण का निर्णय लिया गया था, लेकिन कागजी कार्रवाई की देरी ने सब बिगाड़ दिया।
क्या कहते हैं अधिकारी?
छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के वरिष्ठ प्रबंधक जुगनू सिंह ने कहा –
“क्यूआर कोड सिस्टम लागू करने में थोड़ी देरी हुई है, लेकिन हम जल्द ही सभी किताबें स्कूलों तक पहुंचा देंगे।”
समाज के लिए सवाल:
– क्या सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं?
– क्या बच्चों की पढ़ाई से खिलवाड़ करने वालों पर कोई कार्रवाई होगी?
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???? अगर आपके बच्चे के स्कूल में भी किताबें नहीं पहुंची हैं, तो शिकायत करें!
???? शिक्षा विभाग हेल्पलाइन: 14417
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