Surajpur News Today:- होमवर्क नहीं करने पर नर्सरी के मासूम को पेड़ से लटकाया

होमवर्क नहीं करने पर नर्सरी के मासूम को पेड़ से लटकाया

Surajpur News Today:- होमवर्क नहीं करने पर नर्सरी के मासूम को पेड़ से लटकाकर दिया सजा , साथ ही संचालक के बिगड़ गए बोल

Surajpur News Today:- सूरजपुर जिले के अंतर्गत रामानुज नगर के एक निजी स्कूल से एक मामला निककर सामने आ रहा है जहा पर नर्सरी के एक मासूम बच्चे के साथ क्रूरता का मामला देखने को मिला , होमवर्क नहीं करने आने पर स्कूल की शिक्षिकाओं ने बच्चे को पेड़ से लटकाकर उसे सजा दिया है जो की सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वाइरल हो रहा है 

सूरजपुर न्यूज़ :- प्राप्त जानकारी के अनुसार सूरजपुर जिले के अंतर्गत आने वाला रामानुजनगर विकासखंड के एक ग्राम नारायणपुर  पर स्थित निजी विद्यालय हंस वाहिनी विद्या मंदिर में शिक्षा के नाम पर अमानवीय हरकत का मामला सामने देखने को मिला है। जहा पर नर्सरी के एक मासूम बच्चे को होमवर्क न करने आने पर और शरारत की शिकायत पर स्कूल की दो शिक्षिकाओं ने टी-शर्ट के सहारे पेड़ में लटकाकर सजा दिया है। इस पुरे घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी के साथ वायरल हो रहा है सोशल मीडिया में वीडियो एते ही पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है।

सोशल मीडिया में वीडियो सामने आते ही बच्चे के परिवार वाले स्कूल पहुंचे और जमकर हंगामा प्रदर्सन किया। इसके बाद में प्रबंधन ने उन्हें मनाने की काफी कोशिश की। और इसी बीच रामानुजनगर पुलिस और बीईओ डीएस लकड़ा भी मौके पर पहुंचे और जांच की प्रक्रिया शुरू कर दिया गया है । मामले में डीईओ अजय मिश्रा से प्रतिक्रिया लेने के लिए कई बार कॉल किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। और कोई जवाब नहीं दिया ।

ग्रामीणों ने भी लगाए गंभीर आरोप

ग्रामीणों ने  भी गंभीर आरोप लगाया कि स्कूल में पहले भी बच्चों को अमानवीय तरीके से दंड देने की घटना पहले भी सामने आ चुकी हैं। यहां तक कहा गया कि कुछ बच्चों को कुएं में लटकाने तक की बातें भी सामने आई हुई हैं। हालांकि स्कूल प्रबंधन ने इन आरोपों से सरासर इनकार किया है।

संचालक ने भी दे दिया विवादित बयान

स्कूल संचालक सुभाष शिवहरे ने इस मामले कहा कि आजकल के बच्चे उदण्ड और हाईब्रिड हैं। इन्हें डराने के लिए ऐसा करना पड़ता है। यह बयान न केवल गैर जिम्मेदाराना है बल्कि बच्चों की मनोवैज्ञानिक सुरक्षा के प्रति काफी ज्यादा संवेदनहीनता को भी दर्शाता है।

बच्चों को कठोर दंड देने पर कार्रवाई का भी है प्राविधान

कानून के अनुसार इस घटना ने सीधे तौर पर कई शिक्षा और बाल संरक्षण नियमों का उल्लंघन भी किया है। आरटीई एक्ट 2009 की धारा 17 के तहत बच्चों पर शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न पूरी तरह प्रतिबंधित है। जेजे एक्ट 2015 के तहत बच्चे के साथ किसी भी प्रकार का अपमानजनक व्यवहार दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।

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