पापाराव सरेंडर: बस्तर में लाल आतंक का अंत करीब
पापाराव के सरेंडर से बदलेगा बस्तर का इतिहास
पापाराव बस्तर के इंद्रावती नेशनल पार्क के घने जंगलों से बाहर निकलकर आत्मसमर्पण की राह पर आ चुका है, जो क्षेत्र के इतिहास में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। 25 लाख रुपये का इनामी यह शीर्ष माओवादी कमांडर अब हथियार छोड़ने के लिए तैयार है।
पापाराव के साथ 17 माओवादियों का बड़ा फैसला
पापाराव के साथ डीकेएसजेडसी सदस्य प्रकाश माड़वी, अनिल ताती सहित कुल 17 माओवादी सरेंडर कर रहे हैं। इनमें 7 महिला माओवादी भी शामिल हैं, जो इस घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बनाता है।
पापाराव का 35 साल लंबा माओवादी सफर खत्म
पापाराव सुकमा जिले के नीलामड़गू गांव का निवासी है और पिछले 35 वर्षों से माओवादी संगठन में सक्रिय रहा है। प्रदेश में शीर्ष कमांडरों के खत्म होने के बाद वह अंतिम बड़े नेताओं में शामिल था।

पापाराव सरेंडर की सुरक्षा व्यवस्था और प्रक्रिया
पापाराव और उसके साथी सुरक्षा बलों की निगरानी में जंगल से बाहर निकले हैं। सभी माओवादी बीजापुर जिले के कुटरू थाना पहुंच चुके हैं और अब बस्तर आईजी सुंदरराज पी. के सामने औपचारिक समर्पण करेंगे।
पापाराव के बाद बस्तर में माओवाद कमजोर
पापाराव के आत्मसमर्पण के बाद बस्तर में माओवादी संगठन लगभग समाप्ति की ओर बढ़ रहा है। विज्जा हेमला और सोढ़ी केशा जैसे कुछ नाम जरूर बचे हैं, लेकिन उनका प्रभाव अब नगण्य है।
पापाराव सरेंडर से टूटा रेड कमांड नेटवर्क
पापाराव के सरेंडर से पहले ही पिछले दो वर्षों में माओवादी संगठन को भारी नुकसान हुआ है। बसवराजू, हिड़मा, कोसा जैसे बड़े कमांडर मारे गए, जबकि 2700 से ज्यादा कैडर सरेंडर कर चुके हैं।
पापाराव के बाद देश में माओवाद का अंतिम चरण
पापाराव के आत्मसमर्पण के साथ ही छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में माओवादी नेटवर्क लगभग खत्म हो चुका है। अब झारखंड में मिसिर बेसरा आखिरी बड़ी चुनौती के रूप में बचा है।







