लइका चिन्हारी: ड्रॉपआउट बच्चों की डिजिटल पहचान, स्कूल लाने पर मिलेंगे 500 रुपये
लइका चिन्हारी एप के जरिए छत्तीसगढ़ में स्कूल से बाहर हो चुके बच्चों की डिजिटल पहचान की जाएगी। शाला अप्रवेशी, शाला त्यागी और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की जानकारी जुटाने के लिए घर-घर सर्वे किया जाएगा। इसके बाद बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा।
राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा की ओर से तैयार कराए गए लइका चिन्हारी मोबाइल एप के माध्यम से सर्वे के दौरान बच्चों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इस प्रक्रिया में बच्चों की पहचान से लेकर स्कूल में दोबारा प्रवेश और उन्हें स्कूल में बनाए रखने तक की जानकारी दर्ज की जाएगी।

लइका चिन्हारी एप से कैसे होगी बच्चों की पहचान?
लइका चिन्हारी एप में सर्वे के दौरान बच्चों से जुड़ी जरूरी जानकारी दर्ज की जाएगी। इसके लिए चयनित सर्वेकर्ता अपने एंड्राइड मोबाइल में गूगल प्ले स्टोर से एप डाउनलोड करेंगे।
एप पर सर्वेकर्ता को अपना नाम, मोबाइल नंबर, बसाहट, स्कूल सहित जरूरी जानकारी दर्ज करके रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसके बाद संबंधित संकुल समन्वयक अपनी संकुल ID के माध्यम से सर्वेकर्ता के चयन और पात्रता का ऑनलाइन सत्यापन करेंगे।
सत्यापन पूरा होने के बाद ही सर्वेकर्ता को प्रोत्साहन राशि की पात्रता मिलेगी।
लइका चिन्हारी में किन बच्चों का रिकॉर्ड बनेगा?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस अभियान में मुख्य रूप से ऐसे बच्चों की पहचान की जाएगी जो:
- स्कूल में दाखिल नहीं हुए हैं।
- स्कूल छोड़ चुके हैं।
- विशेष आवश्यकता वाले बच्चे हैं।
- दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़े जा सकते हैं।
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लइका चिन्हारी से सर्वे पर मिलेंगे 20 रुपये
लइका चिन्हारी एप पर चिन्हांकित प्रत्येक छात्र की प्रविष्टि और सत्यापन पूरा होने के बाद सर्वेकर्ता को 20 रुपये प्रति छात्र दिए जाएंगे।
इसका उद्देश्य मैदानी स्तर पर बच्चों की पहचान और उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है। सर्वे के लिए स्थानीय स्तर पर साक्षरता प्रेरकों और अतिथि शिक्षकों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
जरूरत पड़ने पर योग्य स्थानीय लोगों के साथ नियमित शासकीय कर्मचारियों से भी सर्वे कराया जा सकेगा।
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स्कूल में दाखिले के बाद 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि
बच्चे की पहचान के बाद उसे स्कूल में दोबारा प्रवेश दिलाने पर भी प्रोत्साहन का प्रावधान है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बच्चे का स्कूल में प्रवेश कराने और उसे कम से कम तीन महीने तक स्कूल में बनाए रखने के बाद प्राचार्य के सत्यापन पर सर्वेकर्ता को 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलेगी।
इस तरह अभियान में केवल बच्चों की पहचान करने के बजाय उन्हें दोबारा स्कूल से जोड़ने और वहां बनाए रखने पर भी ध्यान दिया गया है।
माध्यमिक स्तर के बच्चों के लिए भी प्रावधान
माध्यमिक स्तर के बच्चों को छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल के माध्यम से परीक्षा दिलाने पर भी 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान बताया गया है।
सभी भुगतान जिलों के माध्यम से डीबीटी के जरिए किए जाएंगे।
छत्तीसगढ़ में 13.8 प्रतिशत ड्रॉपआउट दर
उपलब्ध जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ में माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर करीब 13.8 प्रतिशत बताई गई है। इसी को देखते हुए बच्चों के सर्वे और उन्हें दोबारा स्कूल से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मैदानी सर्वे के जरिए ऐसे बच्चों तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी जो वर्तमान में स्कूल की नियमित शिक्षा व्यवस्था से बाहर हैं।
सर्वेकर्ताओं का होगा ऑनलाइन सत्यापन
लइका चिन्हारी एप की प्रक्रिया में सर्वेकर्ताओं के सत्यापन को भी शामिल किया गया है। सर्वेकर्ता के रजिस्ट्रेशन के बाद संबंधित संकुल समन्वयक ऑनलाइन जानकारी की जांच करेंगे।
सत्यापन पूरा होने के बाद ही प्रोत्साहन राशि से जुड़ी पात्रता आगे बढ़ेगी। इससे सर्वे में दर्ज की गई जानकारी को संबंधित स्तर पर सत्यापित करने की व्यवस्था बनाई गई है।
लइका चिन्हारी योजना में भुगतान कैसे होगा?
अभियान के तहत अलग-अलग चरणों में प्रोत्साहन राशि का प्रावधान है।
मुख्य बातें:
- प्रत्येक चिन्हांकित और सत्यापित छात्र पर 20 रुपये।
- बच्चे को स्कूल में प्रवेश दिलाने के बाद 500 रुपये।
- स्कूल में बच्चे के कम से कम 3 महीने तक बने रहने के बाद प्राचार्य का सत्यापन जरूरी।
- माध्यमिक स्तर के बच्चों को राज्य ओपन स्कूल के माध्यम से परीक्षा दिलाने पर भी 500 रुपये का प्रावधान।
- भुगतान जिलों के माध्यम से डीबीटी से किया जाएगा।
आगे क्या होगा?
अभियान के तहत पहले मैदानी स्तर पर बच्चों की पहचान और सर्वे किया जाएगा। इसके बाद संबंधित जानकारी एप में दर्ज होगी और संकुल समन्वयक उसका ऑनलाइन सत्यापन करेंगे।
बच्चों को स्कूल में दोबारा प्रवेश दिलाने के बाद उनके कम से कम तीन महीने तक स्कूल में बने रहने की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी। इसी आधार पर प्राचार्य के सत्यापन के बाद निर्धारित प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जाएगा।
खबर की 7 बड़ी बातें
- लइका चिन्हारी एप से स्कूल से बाहर बच्चों की डिजिटल पहचान होगी।
- घर-घर सर्वे के जरिए बच्चों का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
- सर्वेकर्ता को सत्यापित छात्र की प्रविष्टि पर 20 रुपये मिलेंगे।
- स्कूल में प्रवेश और 3 महीने तक बने रहने पर 500 रुपये मिलेंगे।
- माध्यमिक स्तर के बच्चों के लिए राज्य ओपन स्कूल के माध्यम से परीक्षा का प्रावधान है।
- भुगतान जिलों के माध्यम से डीबीटी से होगा।
- सर्वेकर्ताओं का ऑनलाइन सत्यापन संकुल समन्वयक करेंगे।
FAQ — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
लइका चिन्हारी क्या है?
लइका चिन्हारी छत्तीसगढ़ में स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान और उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के लिए तैयार किया गया मोबाइल एप है।
लइका चिन्हारी से किन बच्चों की पहचान होगी?
शाला अप्रवेशी, शाला त्यागी और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान करने के लिए सर्वे किया जाएगा।
लइका चिन्हारी में सर्वेकर्ता को कितने रुपये मिलेंगे?
चिन्हांकित छात्र की प्रविष्टि और सत्यापन पूरा होने पर सर्वेकर्ता को 20 रुपये प्रति छात्र देने का प्रावधान बताया गया है।
स्कूल में बच्चे का प्रवेश कराने पर कितनी राशि मिलेगी?
बच्चे का स्कूल में प्रवेश कराने और उसे कम से कम तीन महीने तक स्कूल में बनाए रखने के बाद प्राचार्य के सत्यापन पर 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलेगी।
लइका चिन्हारी में भुगतान कैसे होगा?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार सभी भुगतान जिलों के माध्यम से डीबीटी के जरिए किए जाएंगे।
Author: kamlesh verma
कमलेश वर्मा एक डिजिटल पत्रकार हैं, जो राष्ट्रीय, राज्य, टेक्नोलॉजी, मौसम और सरकारी योजनाओं से जुड़ी तथ्यपरक एवं विश्वसनीय खबरें सरल हिंदी में पाठकों तक पहुँचाते हैं। इनके द्वारा लिखे गए लेख आधिकारिक स्रोतों, सरकारी घोषणाओं और विश्वसनीय रिपोर्टों के आधार पर तैयार किए जाते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी मिल सके।






