Raipur News Today: आंबेडकर अस्पताल की सांसें अटकीं, कबाड़ मशीनों के भरोसे इलाज
Raipur News Today: आंबेडकर अस्पताल में 2005 की मशीनों से इलाज, मरीजों की जान जोखिम में
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर संकट में है। जिस अस्पताल ने कोरोना काल में हजारों जिंदगियां बचाईं, वही आज पुरानी और जर्जर मशीनों के कारण सवालों के घेरे में आ गया है। हालात ऐसे हैं कि डॉक्टर इलाज करना चाहते हैं, लेकिन उनके पास आधुनिक जांच और उपचार के लिए जरूरी तकनीक ही मौजूद नहीं है।
बजट-फाइलों में उलझी मशीनें, डॉक्टर भी सिस्टम से बेबस
छह साल से नहीं बदलीं मशीनें, तकनीक से पिछड़ता अस्पताल
चिकित्सा विज्ञान तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन आंबेडकर अस्पताल पिछले छह वर्षों से उसी पुराने ढांचे में अटका हुआ है। इस दौरान एक भी बड़ी आधुनिक मेडिकल मशीन की खरीद नहीं हो सकी। रेडियोलॉजी और रेडियोथेरेपी जैसे अहम विभाग आज भी आउटडेटेड तकनीक के सहारे चल रहे हैं, जिससे जांच की सटीकता और इलाज की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है।
जांच में देरी, इलाज में खतरा
अस्पताल में आज भी 2005-06 की मशीनों से बीमारियों की पहचान की जा रही है।
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एमआरआई और सीटी स्कैन: वर्ष 2012 में खरीदी गई मशीनें अपनी क्षमता खो चुकी हैं, मरीजों की संख्या बढ़ रही है और जांच की कतारें लंबी होती जा रही हैं।
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एक्स-रे और सोनोग्राफी: पांच में से एक एक्स-रे मशीन बंद हो चुकी है, जबकि 18 साल पुरानी सोनोग्राफी मशीनों से सटीक रिपोर्ट मिलना मुश्किल हो गया है।
कैंसर मरीजों पर सबसे बड़ा असर
कैंसर जैसे गंभीर मामलों में जहां समय सबसे अहम होता है, वहां लीनियर एक्सीलेरेटर जैसी पुरानी मशीनें मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगे इलाज के लिए मजबूर कर रही हैं। सरकारी अस्पताल की सीमाएं सीधे तौर पर मरीजों की जेब और जान दोनों पर भारी पड़ रही हैं।
बजट है, लेकिन मशीनें नहीं
अस्पताल को हाईटेक बनाने के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया था, लेकिन सरकार से केवल 94.5 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली। हैरानी की बात यह है कि स्वीकृत बजट के बावजूद टेंडर प्रक्रिया और फाइलों की उलझनों के कारण नई मशीनें अब तक अस्पताल नहीं पहुंच पाई हैं।
सरकारी डॉक्टरों को भी सिस्टम पर भरोसा नहीं
पंडरी जिला अस्पताल में इलाज कराने आए सुबोध साहू बताते हैं कि सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट सामान्य आने के बावजूद डॉक्टर ने निजी अस्पताल में दोबारा जांच कराने की सलाह दी। यह हालात सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर डॉक्टरों के खुद के भरोसे को भी उजागर करते हैं।
प्रशासन का पक्ष
आंबेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर का कहना है कि एमआरआई और दो सीटी स्कैन मशीनों के लिए स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि अन्य मशीनों के लिए प्रस्ताव अधिष्ठाता कार्यालय को भेजा गया है।
कुल मिलाकर, राजधानी रायपुर की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य संस्था आज आधुनिक तकनीक के इंतजार में है और तब तक मरीजों की सांसें पुरानी मशीनों के सहारे अटकी हुई हैं।
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